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ऐसे थे मेरे ताऊ जी

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ताऊ जी नहीं चाहते थे कि उनके जाने के बाद कोई रोए |हम भी उनकी इस इच्छा का मान रखना चाहते हैं ,माना कि यह आसान तो नहीं मगर असंभव भी तो नहीं |यही जीवन है, समय की गति है जो कभी नहीं रुकती |एक इंसान जो इस दुनिया में जन्म लेता है, उसका संसार से विदा कहना भी तय है मगर प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार से, अपने कर्म से अपनी एक जगह बना लेता है, वो भी लोगों के दिलों में |आज लोग उनके बारे में जो बातें कर रहे हैं, उन्हें याद कर रहे हैं, वह सब उनकी कमाई है ,नहीं तो आज के व्यस्त जीवन में जहाँ लोग खुद को भूल जाते हैं, वहाँ किसी की यादों में जगह बना पाना भी किसी आश्चर्य से कम तो नहीं | एक बार हमें प्रकृति के फैसले से दुःख अवश्य होता है क्योंकि हम इतने समझदार नहीं होते कि ईश्वर के हर निर्णय को समझ पाएँ |ताऊ जी को दर्द से बहुत डर लगता था |वे चाहते थे कि उनके प्राण शांति से चले जाएं, यही तो हुआ|मुझे इस बात का दुःख था कि मैं ताऊ जी से अंतिम समय में मिल नहीं पाई तथा उनका कोई सपना पूरा नहीं कर पाई मगर ताऊ जी का आशीर्वाद, उनके द्वारा दिखाया गया सद्मार्ग, उनकी सीख सदैव मेरे साथ हैं|मैं उनका हर सपना जरूर पूरा क...

मेरे ताऊ जी ~2

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आखिर हम एक घण्टे के बाद गाँव पहुँचे |घर के सामने बहुत भीड़ थी|जैसे ही अंदर पहुँचे तो रोने की तेज -तेज आवाजें सुनाई दी|बहुत ही करुण दृश्य था वह! इससे पहले मैने ऐसा कभी नहीं देखा था |किसी को भी होश नहीं था |सब गम में इस कदर डूबे हुए थे |वहाँ तक मैने किसी तरह खुद को रोक रखा था मगर वहाँ जाकर नहीं रोक पाई और मैं भी उस गमगीन दुनिया का एक हिस्सा बन गई | मेरे ताऊ जी ~2 किसी अपने को खोने का दर्द क्या होता है, किसी इंसान का मोल क्या होता है, लगाव क्या होता है ;ऐसे बहुत से सवालों के जवाब दे रहा था वो दृश्य |सबकी आँखों में आँसू थे मगर फिर भी सब एक-दूसरे को समझाने और चुप कराने का प्रयास कर रहे थे |समझाते भी क्या? सब जानते थे कि वे लाचार हैं ,अब कुछ नहीं हो सकता, यही शाश्वत सत्य है मगर क्या यह जान लेने से वो पीड़ा कम हो सकती थी? बिल्कुल नहीं | माँ (ताई जी) का रो-रोकर बुरा हाल था|माँ बेहद कोमल हृदय हैं |उनसे किसी और का दुःख भी नहीं देखा जाता था, जब भी ऐसे माहौल में जाती थी तो बेहोश हो जाया करती थी |यहाँ उनकी क्या दशा होनी थी, यह अनुमान लगाना किसी के लिए मुश्किल नहीं था |माँ एक भारतीय पतिव्रत...

मेरे ताऊ जी ~1

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17 मार्च, 2019 मेरे ताऊ जी :श्री जगदीश चन्द्र नरवाल  दोपहर का समय था, मैं सीढियों में बैठकर पढ़ रही थी |सभी मेरे आस-पास ही थे |थोड़ी देर पहले ही पता चला था कि मेरे ताऊ जी, जगदीश चन्द्र नरवाल को खराब स्वास्थ्य के कारण अस्पताल में दाखिल कराया गया है |सब आश्चर्य में थे कि अचानक क्या हुआ |दरअसल ताऊ जी को पिछले साल से कैंसर था |इलाज भी लगभग हो चुका था,सेहत में सुधार भी था, मगर बहुत जल्दी तबीयत दोबारा खराब होने लगी |पापा थोड़ी देर बाद अस्पताल जाने वाले थे |तय हुआ कि रात को ताऊ जी की देखभाल के लिए रीना जाएगी, शायद इससे उनकी सेहत में जल्दी सुधार होगा | इसका कारण यह था कि मैं ताऊ जी की बहुत लाडली थी |मुझे याद है ;लगभग 9 साल पहले की बात है |ताऊ जी को रात को दिल का दौरा पड़ा था |उन्हें लगा कि यह उनका अंतिम समय था |उन्हें अस्पताल ले जाने लगे तो उससे पहले उन्होंने कहा कि वो रीना से मिलना चाहते हैं |मैं उनके पास गई तो उनके सीने में बहुत तेज दर्द था|मुझे देखकर वे तेज -तेज रोने लगे और मुझे समझाया कि मैं मम्मी-पापा का ध्यान रखूँ और खूब मन लगाकर पढाई करूँ|मेरी आँखों में भी आँसू आ गए और...