यही तो सच है...
यही तो सच है... यही तो सच है उमरें बीत जाती हैं सच को तलाशने में लेकिन ये शायद इतना मुश्किल भी तो नहीं ... आज, अभी जो पल है वही अभी तो सच है अगला पल कुछ और है तब वह भी सच है... आज मैं जो देखती हूँ आज मैं जो सोचती हूँ सुनती और समझती हूँ मेरे लिए वो सच है मैं जो अनुभव करती हूँ झूठ हो सकता है मगर ये झूठ है ये भी तो सच ही है आज मेरी जो कल्पना है कल हो सकती सच है मेरी आज की साधना अभी यही तो सच है तो बोलो सच क्या है? मेरी जो समझ है मेरे लिए वो सच है तो इसे स्वीकारने में कैसी झिझक है? This poem is also available on my u-tube channel : Click here
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