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मत दिखाओ दुनिया को टूट चुके हो तुम...

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मत दिखाओ दुनिया को कि टूट चुके हो तुम...  मत दिखाओ दुनिया को  कि टूट चुके हो तुम  खुद से इस कदर  रूठ चुके हो तुम...  क्या लगता है तुम्हें?  दुनिया जोड़ सकती है?  नहीं!  तुम्हारे समेटे हुए टुकडों को  फिर से तोड़ सकती है  मत दिखाओ दुनिया को  कि हार चुके हो तुम  निराशा का आँचल  स्वीकार चुके हो तुम ... क्या लगता है तुम्हें?  यह जीत दिला सकती है?  नहीं! तुम्हारे हारे दिल को  जहर पिला सकती है  मत दिखाओ दुनिया को  कि रो रहे हो तुम  हर पल उम्मीद को  खो रहे हो तुम  क्या लगता है तुम्हें?  दुनिया दर्द बाँट लेगी?  नहीं!  तुम्हारे दर्द से भी अपना  मतलब छाँट लेगी  अब सवाल है ~ कि क्या करोगे? किससे कहोगे तुम?  इस दर्द को कब तक सहोगे तुम?  जवाब है ~ एक पल जरा ठहर कर  अपनी ओर ही देखो तुम  कुछ नहीं खोया तुमने  वही हो तुम, वही हो तुम!  This poem is also available ...

भैंस हमारी माता है?

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भैंस हमारी माता है?  भैंस हमारी माता है?  कक्षा में गुरू जी पढा रहे थे  शिष्यों को निबंध लेखन सिखा रहे थे  विषय "गऊ माता ",पहला वाक्य ~ "गाय हमारी माता है " भोले बच्चे ने कहा ~ "गुरु जी! प्रश्न बड़ा है  मेरे सामने खड़ा है  माता उसे कहते हैं  जिसका दूध पीते हैं  तो क्या भैंस हमारी माता है? " गुरु जी बोले ~ "बेटा, ऐसा नहीं कहते  सदियों से गायों को हमने अपनी माँ माना है " शिष्य बोला ~ "माँ होती तो उन्हें देखकर  हम यूं कतराते होते आते ही दहलीज़ पर लाठी से भगाते होते झूठ बोलते हो गुरु जी  मैने सब कुछ देखा है  गाय माता, भैंस नहीं ये तो सरासर धोखा है" गुरु जी ने सोचा ~ "हम जो उन्हें  पढाते हैं  वो सिखा भी पाते हैं?  क्या हम उन्हें रिश्तों का यही अर्थ समझाते हैं?" उस बालक के सवाल ने दर्पण हमें दिखा दिया उस दिन उसने मानो गुरु जी को कुछ सिखा दिया... This poem is also available on my u-tube channel : Click here

अपना देश

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अपना देश  अपना देश  रहते हैं हम जिस देश में  वह देश बड़ा भव्य है अपना भी कुछ जीवन में  उसके प्रति कर्त्तव्य है  अपने देश की मिट्टी  हमारे लिए स्वर्ग है अपने देश के वीरों पर  हमें बहुत गर्व है  वतन पर जो मर-मिटे  हम उन्हें स्मरण करें  उन देशभक्तों को आज हम नमन करें  भारत के इतिहास का  बहुत बड़ा ये हिस्सा आओ तुम्हें सुनाएँ हम आजादी का किस्सा गुलामी की थी दासता  बड़ा कठिन था रास्ता धूल बन चुकी थी तब तक  हर किसी की आस्था  तब हर हिन्दुस्तानी जागा विद्रोह में हर कोई भागा... हर भारतवासी में जोश था,जुनून था उन देशभक्तों में वीरता का खून था  प्यारे वतन के लिए  दे दी अपनी जान मर कर भी न जाने दी  भारत माँ की आन  उन्हीं के कारण है  भारत की ये शान  इसलिए हैं करते हम  उन वीरों का गुणगान  देश के दीवानों  आजादी के मतवालों  करते बारंबार नमन हम  देश के रखवालों  ए देश के शही...

दोस्ती

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दोस्ती  दोस्ती  जो तोड़े न टूटे, वो बंधन है दोस्ती  जो भर दे हर घाव, वो मरहम है दोस्ती  ढूंढे खुशियों के तराने, दोस्त के लिए  ऐसा ही तो एक, मकसद है दोस्ती...  जो हर नाता, पल में तोड़ जाए मुसीबतों को देख,मुँह मोड़ जाए  जब चाहिए हो साथ,तन्हा छोड़ जाए  ऐसी खुदगर्ज भावना, नहीं होती दोस्ती  जो सुख और दुःख में साथ निभाए ऐसे कुछ आंसू-सी, होती है दोस्ती  दोस्त की कमियाँ, नहीं देखती दोस्ती  न ही कोई मतलब, देखती है दोस्ती  जो लाँघ हर खाई, दिलों को मिलाए  ऐसा ही एक सेतू, होती है दोस्ती  नहीं कि बनकर जो, उड़ जाए धूल  नहीं कि बनकर जो, चुप जाए सूल  नहीं कि होकर जुदा, जिसे जाए भूल  क्षणभंगुर के लिए, नहीं होती दोस्ती  जो मुरझाकर भी, जीवन को महकाए  ऐसा ही एक फूल-सी, होती है दोस्ती  जीने की मंजिल और सहारा है दोस्ती  डूबते सागर में, जीवन की शिकारा है दोस्ती  जो रोशन करे, दोस्त के जीवन में बहारें  ऐसा ही जगमगाता, सितारा है दोस्ती....

अर्चना

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अर्चना  अर्चना अर्चना एक अनुभूति है एक भाव की जागृति है एक उत्कृष्ट भाव~  जो परम सत्य के समीप है कि अनेक रूपों वाली वो शक्ति एक है हृदय से की जाने वाली भक्ति एक है जल, वायु,धरा,गगन वो प्रकृति एक है रीति-नीति, भाषा, सभ्यता वो संस्कृति एक है जिसे सब अनुभव करते हैं वो संवेदना एक है पशु-पक्षी और मानव की वेदना एक है मंदिर-मस्जिद, चर्च-गुरुद्वारा मैं, तुम और वो एक हैं हम सब उसी एक के बस रूप अनेक हैं...

हीरो का साथ

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हीरो का साथ  हीरो का साथ  नई फिल्म रिलीज हुई  हॉल दर्शकों से भरा हुआ हीरो काफी स्टाइलिश है शराब का शौकीन  आज ही उसे कामयाबी मिली तो पार्टी तो बनती है हीरो गाता है ~ "आज फिर पीने की तमन्ना है " दर्शकों के चेहरे पर संतुष्टि है  हीरो को खुद में उतार चुके हैं  लेकिन जीवन है  दुःख भी आएंगे  हीरो बर्बाद हो चुका है  फिर गाता है ~ "मुझे पीने का शौक नहीं...  पीता हूँ गम भुलाने को " दर्शक गमगीन हैं... मगर हीरो के साथ  हीरो शराब की शरण में है  जो बचा था वो भी गया  दर्शक अब भी संतुष्ट  हीरो संघर्ष क्यों करे?  हार मानना स्वाभाविक है  मुश्किलों के सामने घुटने टेकने ही पड़ते हैं  मगर हीरो समझदार निकला उसने शराब छोड़ दी ... इस बार दर्शक निराश हैं एकमात्र सहारा छोड़ना  कोई समझादारी है?  पूरी फिल्म में साथ दिया  मगर अब और नहीं...  क्यों?  क्योंकि नशे की लत छोड़ना आसान नहीं  मुश्किल में कोई किसी के साथ न...

हमारे वीर जवान

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हमारे वीर जवान  हमारे वीर जवान  आजादी के मतवाले थे भारत माँ के रखवाले थे वे युवक हिम्मत वाले थे खुद को भी किया बलिदान  वे लोग बड़े बलिदानी थे  सहकर भी लाखों दुःख  हमें दे गए कितने सुख हर दुश्मन को हरा दिया वे वीर जवान हमारे थे   करके खुद को भी बलिदान न जाने दी माँ की शान चरणों में जो हुए निहाल वे मातृ भक्त हमारे थे   अपनी सारी यादें वे हमारे दिल में छोड़ गए साहस-बलिदान का पाठ हमारे लिए भी छोड़ गए...